बांग्ला वर्णमाला का पुनर्निर्माण करने वाले विद्वान, समाज सुधारक और लेखक 'ईश्वर चंद्र विद्यासागर'

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बांग्ला वर्णमाला का पुनर्निर्माण करने वाले विद्वान, समाज सुधारक और लेखक 'ईश्वर चंद्र विद्यासागर'

26 सितंबर 1820 को जन्मे ईश्वर चंद्र विद्यासागर सिर्फ बंगाल के ही नहीं बल्कि भारत के प्रसिद्ध विद्वान, शिक्षक, समाज-सुधारक और लेखक रहे हैं. पुरानी शैक्षिक प्रणाली को पूरी तरह से बदलने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है. विद्यासागर की ‘बोर्ना पोरीचोय’ (पत्र का परिचय), यानी कि बांग्ला वर्णमाला का परिचय देने वाली पुस्तक आज भी एक बांग्ला बच्चे को पढ़ने के लिए दी जाने वाली पहली पुस्तक है. 29 जुलाई 1891 को लगभग 71 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.

26 सितंबर 1820 को जन्मे ईश्वर चंद्र विद्यासागर सिर्फ बंगाल के ही नहीं बल्कि भारत के प्रसिद्ध विद्वान, शिक्षक, समाज-सुधारक और लेखक रहे हैं. पुरानी शैक्षिक प्रणाली को पूरी तरह से बदलने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है. विद्यासागर की ‘बोर्ना पोरीचोय’ (पत्र का परिचय), यानी कि बांग्ला वर्णमाला का परिचय देने वाली पुस्तक आज भी एक बांग्ला बच्चे को पढ़ने के लिए दी जाने वाली पहली पुस्तक है. 29 जुलाई 1891 को लगभग 71 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. 

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