जानिए पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से जराकुस (लेमनग्रास) के फायदे
जानिए पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से जराकुस (लेमनग्रास) के फायदे
जराकुस (लेमनग्रास )एरोमैटिक प्लांट (सगंध पौधा) है, जिसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। यह एंटी ऑक्सिडेंट व एंटी फंगल होता है। कई जानकार मानते हैं कि इसकी चाय के नियमित इस्तेमाल से डायबीटीज, मोटापा, पेट की बीमारियों, नींद की समस्या और सांस संबंधी बीमारियों में भी राहत मिलती है। हालांकि वैज्ञानिक अभी इन गुणों पर शोध कर रहे हैं।लोगों ने तुलसी की तरह लेमनग्रास की पत्तियों की चाय पीना शुरू कर दिया है। आम धारणा है कि इस दौर में लेमनग्रास की चाय का सेवन सर्दी जुकाम के लिए कारगर घरेलू नुस्खा है। लेमनग्रास के तेल को फ्रेगरेंस और फ्लेवर इंडस्ट्री में काफी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इसके औषधीय गुणों के कारण फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री भी इसके तेल का इस्तेमाल करती हैं।लेमन ग्रास की खुशबू नींबू की तरह खट्टी मीठा और हल्का होती है। लेमनग्रास, चाहे सूखा हो या ताजा, इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एनाल्जेसिक, एंटीडिप्रेसेंट, एंटीसेप्टिक, एंटीपीयरेटिक, एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल, कैंसर विरोधी और एंटी-एजिंग और कसैले सहित कई चिकित्सीय विशेषताएं होती हैं,नींबू की सुगंध वाली यह घास एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेंटरी, एंटी-सेप्टिक और विटामिन सी से भरपूर है। इसमें कई पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल, पोटैशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, मैंगनीज, विटामिन बी-6, विटामिन सी, विटामिन ए आदि पाए जाते हैं। चाय के अलावा इसका इस्तेमाल सूप बनाने में भी हो सकता है। इसके अलावा इसका पेस्ट बनाकर इसे सब्जियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। लेमनग्रास में कैंसर सहित कई बीमारियों से छुटकारा दिलाने वाले गुण होते हैं। इस घास में एक खास तत्व होता है जिसे सिट्राल कहते हैं। ये तत्व कैंसर सेल्स को शुरुआती अवस्था में रोकने में कारगर है। इस घास को ब्रेस्ट कैंसर और स्किन कैंसर में काफी फायदेमंद पाया गया है। इसका सेवन पाचन सुधारने में मदद करता है। इससे पेट की सूजन, पेट फूलना, पेट में ऐंठन, अपच, कब्ज, दस्त, उल्टी और ऐंठन जैसी पाचन संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलने में मदद मिलती है। यह यूरिक एसिड के स्तर को कम करके किडनी और लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। लेमनग्रास के सेवन से वजन भी कम किया जा सकता है, क्योंकि इसमें सिट्रोल पाया जाता है जो पेट में वसा के संचय को रोक देता है। गठिया या आर्थराइटिस की समस्या में लेमनग्रास तेल का उपयोग करने से राहत मिल सकती है
सूजन रोधी गुण जराकुस में मौजूद सिट्रल और जेरेनियम यौगिकों को इसके सूजनरोधी लाभों के लिए जिम्मेदार माना जाता है, जो आपके शरीर में सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
इसे नींबू घास, चायना ग्रास, भारतीय नींबू घास, मालाबार घास, या कोचीन घास भी कहा जाता है. यह भारतीय उपमहाद्वीप में काफ़ी आम तौर पर उगाई जाती है.
यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत करती है,
यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करती है,
यह मूत्र निर्माण और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करती है,
यह चिंता और तनाव कम करती है,
यह मोटापे को नियंत्रित करती है,
लेमन ग्रास का सेवन ज़रूरी मात्रा में ही करना चाहिए. ज़्यादा लेमन ग्रास खाने से चक्कर आना, जी मिचलाना, या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर आपको लेमन ग्रास से त्वचा में कोई समस्या हो या चक्कर आएं, तो तुरंत इसका सेवन बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें,
जरकुस को घरों में चाय या काढ़े के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। सामान्य चाय में जरकुस की पत्ती को उपयोग करें। जरकुस की सूखी पत्ती को पॉटफोरी (पोटली) बनाकर अलमारी या दीवान में डाल सकते हैं।
यह फंगल और कीड़ो को मारता है।
लेमनग्रास को घरों में चाय या काढ़े के रूप में इस्तेमाल करते है। सामान्य चाय में लेमनग्रास की पत्ती को उपयोग करें। लेमनग्रास की सूखी पत्ती को पॉटफोरी (पोटली) बनाकर अलमारी या दीवान में डाल सकते हैं। यह फंगल और जर्म को मारती है।
