केरल में लहलहाती हिंदी की पताका- अनामिका अनु
‘स्वबोधिनी’ ने दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. सबसे पहले हिन्दी-तमिल स्वबोधिनी तैयार की गयी. इसकी भूमिका महात्मा गांधी ने लिखी थी. एम. के. दामोदरन उण्णि ने इसका मलयालम में अनुवाद किया. उसके बाद हिंदी-अंग्रेजी ‘स्वबोधिनी’ तैयार की गई. इसका मलयालम अनुवाद ए. चंद्रहासन और पी. के. केशवन नायर ने किया.
‘स्वबोधिनी’ ने दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. सबसे पहले हिन्दी-तमिल स्वबोधिनी तैयार की गयी. इसकी भूमिका महात्मा गांधी ने लिखी थी. एम. के. दामोदरन उण्णि ने इसका मलयालम में अनुवाद किया. उसके बाद हिंदी-अंग्रेजी ‘स्वबोधिनी’ तैयार की गई. इसका मलयालम अनुवाद ए. चंद्रहासन और पी. के. केशवन नायर ने किया.
