अशोक वाजपेयी की आलोचना: देश, काल और व्‍याप्‍ति

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अशोक वाजपेयी की आलोचना: देश, काल और व्‍याप्‍ति

हिंदी कविता के गए छह दशकों के लोकप्रिय कवि अशोक वाजपेयी अपनी बेबाकी और मुखरता के लिए जाने जाते हैं. लगभग डेढ़ दर्जन कविता संग्रहों के कवि अशोक वाजपेयी की रचनावली पिछले साल प्रकाशित हुई है जिसके दो खंड उनके आलोचनात्‍मक अवदान पर केंद्रित हैं. हिंदी के सुधी कवि समालोचक डॉ ओम निश्‍चल ने अशोक वाजपेयी की आलोचना पर विचार करते हुए यह पाया है कि उसमें देश,काल और परिस्‍थितियों की पूरी व्‍याप्‍ति है. पढ़िए उनके 84वें जन्‍मदिन पर यह वैचारिक आलेख-

हिंदी कविता के गए छह दशकों के लोकप्रिय कवि अशोक वाजपेयी अपनी बेबाकी और मुखरता के लिए जाने जाते हैं. लगभग डेढ़ दर्जन कविता संग्रहों के कवि अशोक वाजपेयी की रचनावली पिछले साल प्रकाशित हुई है जिसके दो खंड उनके आलोचनात्‍मक अवदान पर केंद्रित हैं. हिंदी के सुधी कवि समालोचक डॉ ओम निश्‍चल ने अशोक वाजपेयी की आलोचना पर विचार करते हुए यह पाया है कि उसमें देश,काल और परिस्‍थितियों की पूरी व्‍याप्‍ति है. पढ़िए उनके 84वें जन्‍मदिन पर यह वैचारिक आलेख- 

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