MP विधान सभा चुनाव- सिंधिया के लिए ग्वालियर के गढ़ की साख का सवाल
मध्य प्रदेश की राजनीति में हमेशा से ग्वालियर-चंबल इलाके की खास अहमियत रही है. आजादी के बाद भी इस इलाके की राजनीति, बोल-चाल में गवालियर कहे जाने वाले, ग्वालियर के पूर्व राजघराने के साए में ही फलती फूलती रही है. इलाके के कुछ प्रत्याशी खुद अपनी राजनीति के लिए पूर्व राजपरिवार का समर्थन हासिल करते रहे तो कुछ सीटों पर सिंधिया परिवार अपनी ओर से दखल देता रहा. कुल मिला कर इस परिवार ने यहां की सीटों पर लंबे वक्त तक अपना असर कायम रखा है, चाहे कांग्रेस की टॉप लीडरशिप में शामिल होकर या फिर जनसंघ-बीजेपी की पहली कतार के नेताओं में बैठ कर. अब बारी है ज्योतिरादित्य सिंधिया की.
मध्य प्रदेश की राजनीति में हमेशा से ग्वालियर-चंबल इलाके की खास अहमियत रही है. आजादी के बाद भी इस इलाके की राजनीति, बोल-चाल में गवालियर कहे जाने वाले, ग्वालियर के पूर्व राजघराने के साए में ही फलती फूलती रही है. इलाके के कुछ प्रत्याशी खुद अपनी राजनीति के लिए पूर्व राजपरिवार का समर्थन हासिल करते रहे तो कुछ सीटों पर सिंधिया परिवार अपनी ओर से दखल देता रहा. कुल मिला कर इस परिवार ने यहां की सीटों पर लंबे वक्त तक अपना असर कायम रखा है, चाहे कांग्रेस की टॉप लीडरशिप में शामिल होकर या फिर जनसंघ-बीजेपी की पहली कतार के नेताओं में बैठ कर. अब बारी है ज्योतिरादित्य सिंधिया की.
