जानिए पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से सोंठ (सूखी अदरक) के फायदा.. सूखी अदरक, जिसे हम सोंठ कहते हैं, इसका कोई बीज

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जानिए पंडित वीर विक्रम नारायण पांडेय जी से सोंठ (सूखी अदरक) के फायदा..

सूखी अदरक, जिसे हम सोंठ कहते हैं, इसका कोई बीज नहीं होता, इसके कंद के ही छोटे-छोटे टुकड़े जमीन में गाड़ दिए जाते हैं। यह एक पौधे की जड़ है। यह भारत में एक मसाले के रूप में प्रमुख है। अदरक यह महत्वपूर्ण मसाले की फसल है।फसल अनुसार उसकी बुवाई मई महिने के पहले 15 दिनों में करते हैं। फसल के लिए गरम वातावरण अच्छा होता है।
सोंठ (सूखी अदरक) का उपयोग
सोंठ का प्रयोग खाने की चीजों का ज़ायका बढ़ाने के लिए किया जाता है,सोंठ में एक प्रकार की खुशबू भी होती है जो खाने में मिलकर अपनी सुगंध से खाने की इच्छा जागृत करती है।
सोंठ और गोंद के लड्डू एक पारम्परिक रेसीपी है जो मिठाई कम बल्कि औषधीय रूप में अधिक प्रयोग किये जाते हैं,इसका प्रयोग प्रसव के बाद जच्चा को खिलाने के लिये किया जाता है,सोंठ जच्चा के शरीर के दर्द को कम करता है. साथ ही इसका उपयोग सर्दियों में होने वाले कमर या जोड़ों के दर्द की दवा के रूप में किया जाता है,सर्दी में आप घर के बुजुर्गों को सोंठ के लड्डू बनाकर खिलाइये उनके लिए ये लड्डू रोगों से बचाव का काम करेंगे।
सोंठ का प्रयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है,मसाले के तौर पर जब सोंठ का इस्तेमाल किया जाता है तब इसके ताजे रूप यानी कि अदरक को कुचलकर अथवा कद्दूकस करके लोग प्रयोग में लाते हैं, अब तो सोंठ पाउडर भी आसानी से बाज़ार में मिलता है जिनका प्रयोग आप अपने भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए कर सकते हैं।
सोंठ का जिक्र आयुर्वेद में भी मिलता है, यह गर्म होने के कारण कफ एवं सर्दी, जुकाम के लिए काफी लाभप्रद होता है,गले में खराश होने पर सोंठ और शहद का सेवन गले को आराम दिलाता है,सौंठ के सेवन से शरीर में ताजगी, स्फूर्ति बनी रहती है।
इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए सर्दी के मौसम में इसका प्रयोग आमतौर पर लोग अधिक करते हैं,सर्दी के मौसम में सोंठ मिली हुई चाय पीने से शरीर में गरमाहट आती है. सर्दी के मौसम में इसका सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी काफी लाभप्रद होता है, गर्मी के दिनों में भी जरूरत के अनुसार खाने में इसका प्रयोग किया जा सकता है,गर्मी के मौसम में सोंठ का प्रयोग अधिक मात्रा में करना सेहत के लिए नुकसानदेय हो सकता है।
अदरक में थर्मोजेनिक एजेंट नामक तत्व होता है जो वसा को जलाने में मदद करता है, जिससे वजन आसानी से कम होता है। गरम पानी के साथ इसका सेवन मोटापे को कम करने में सहायक है।
सोंठ पाचन क्रिया को दुरूस्त कर वजन कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा यह रक्त में मौजूद शर्करा के स्तर को नियंत्रित करके वसा को सक्रिय करता है।
कब्ज, पेट दर्द और अपच जैसी समस्याओं में इसे पीसकर हींग और सेंधा नमक के साथ सेवन करने से आराम मिलता है। इसके अलावा इसे पानी के साथ उबालकर बार-बार पीने से डायरिया में काफी लाभ मिलता है।
सोंठ जोड़ों के दर्द में काफी लाभदायक होती है। इसमें सोंठ, जायफल को पीसकर तिल के तिल के में डालकर, उसमें भीगी हुई पट्टी जोड़ों पर लगाने से आराम मिल सकता है। इसके अलावा उबले हुए पानी के साथ शहद और अदरक पाउडर को पीने से गठिया में लाभ होता है।
सोंठ विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है,जिससे शरीर का तापमान कम हो सकता है और शरीर के जिससे बुखार में भी आराम मिलता है। शहद के साथ इसे खाने से बुखार कम होता है।
इतना ही नहीं सोंठ, हींग और काला नमक मिलाकर लेने से गैस की समस्या में लाभ होता है। पिसी हुई सोंठ और कैरम के बीजों को नींबू के रस में भि‍गोकर छाया में सुखाकर प्रतिदिन सुबह लेने से गैस और पेडू के दर्द में आराम मिलता है।
यदि सोंठ को दूध में उबालकर, ठंडा करके पीने से हिचकी आना बंद हो जाती है। पसलियों में दर्द होने पर इसे पानी में उबालकर ठंडा करके दिन में कम से कम 4 बार पीने से लाभ होता है।
माइग्रेन, सि‍रदर्द, गर्दन और शरीर में दर्द होने पर सूखी अदरक और पानी का लेप बनाकर लगाने से आराम मिलता है। इसे सूंघने से छींक आने पर भी सि‍र दर्द में आराम मिलता है।
यह जी मचलाना, ठंड में पसीना आना, चक्कर और उल्टी आने जैसी समस्याओं को कम करने में भी बेहद फायदेमंद है। यह गर्भवती महिलाओं की समस्याओं को कुछ हद तक कम करने में भी सहायक है।

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