राम वियोग में टूटा हृदय, महाराज दशरथ का निधन

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(आदित्य सोनी)

रेणुकूट (सोनभद्र)। हिंडाल्को रामलीला परिषद द्वारा चल रही रामलीला महोत्सव की श्रृंखला में पाँचवें दिन प्रभु श्रीराम का वनगमन, महाराज दशरथ का निधन तथा केवट प्रसंग का भावुक मंचन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ हिंडाल्को हॉस्पिटल के चिकित्सक डॉ. अजय गुगलानी, डॉ. मोनिका गुगलानी, डॉ. शोभित श्रीवास्तव, डॉ. राकेश रंजन एवं डॉ. प्रेमलता द्वारा श्री गणेश जी की आरती कर किया गया।
मंचन में दिखाया गया कि कैसे माता कैकयी के दो वरदानों के कारण महाराज दशरथ को अपने प्राणप्रिय पुत्र श्रीराम को वनवास भेजना पड़ा। पुत्र वियोग के गहरे दुख में महाराज दशरथ का निधन हो गया। इस हृदय विदारक दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो उठीं।
वनगमन के दौरान राम, लक्ष्मण और सीता की निषादराज से भेंट का प्रसंग दर्शाया गया, जिसमें निषादराज ने प्रभु श्रीराम का आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद प्रस्तुत हुआ केवट प्रसंग—जब प्रभु गंगा पार करने हेतु नाव मांगते हैं, तो केवट विनम्रता से निवेदन करता है, “प्रभु! पहले आपके चरण धोकर ही मैं आपको नाव में बैठा पाऊंगा।” इस अद्भुत संवाद ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया।
इसके साथ ही भरत और शत्रुघ्न के अयोध्या लौटने पर राम-सीता-लक्ष्मण के वनवास और पिता दशरथ के निधन का समाचार मिलने का दृश्य भी मंचित किया गया। भरत और माता कैकयी के बीच तीव्र संवाद ने लीला को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। तत्पश्चात भरत, तीनों माताओं, गुरु वशिष्ठ एवं अयोध्यावासियों के साथ चित्रकूट पहुँचते हैं। यहाँ राम-भरत मिलन का भावुक दृश्य दर्शकों की आंखों को नम कर गया, जब दोनों भाई एक-दूसरे के गले लगकर विलाप करने लगे।
इस मार्मिक प्रस्तुति को देखने के लिए भारी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने कलाकारों के शानदार अभिनय और संवाद अदायगी की सराहना की।
रामलीला के छठे दिन शूर्पणखा नासिका भंग, सीता हरण तथा सुग्रीव-राम मित्रता जैसे रोचक प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

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