छल, वेदना और विरह–जीवंत हुआ सीता हरण का दृश्य
(आदित्य सोनी)
रेणुकूट (सोनभद्र)। हिंडाल्को रामलीला परिषद के तत्वावधान में रामलीला के छठे दिन का मंचन अत्यंत भावनात्मक और रोमांचक रहा। इस अवसर पर सूर्पनखा नासिका भंग, सीता हरण और बाली वध जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया गया, जिसे देखने भारी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में पहुंचे।
लीला की शुरुआत सूर्पनखा प्रसंग से हुई। भगवान राम और लक्ष्मण को देखकर सूर्पनखा ने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे अस्वीकार किए जाने पर उसने माता सीता पर हमला करने का प्रयास किया। इस पर क्रोधित लक्ष्मण ने उसकी नासिका भंग कर दी। आहत सूर्पनखा ने यह समाचार अपने भाई रावण को सुनाया। रावण ने मामा मारीच की सहायता से छलपूर्वक माता सीता का हरण किया। यह हृदयविदारक दृश्य देखकर दर्शकगण स्तब्ध रह गए।
कुटिया में माता सीता को न पाकर भगवान राम और लक्ष्मण अत्यंत दुखी हो उठे तथा उनकी खोज में भटकने लगे। खोज यात्रा के दौरान उनकी भेंट भक्त शबरी से हुई, जिन्होंने प्रभु को सुग्रीव के बारे में बताया और सहयोग का आश्वासन दिया। तत्पश्चात भगवान राम और लक्ष्मण की सुग्रीव से भेंट हनुमान जी ने कराई। सुग्रीव की व्यथा सुनकर भगवान राम ने बाली का वध कर उसे राज्याभिषिक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान से गणेश पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिकारी जयेश पवार, लोकनाथ नायक, हंसराज सिंह, रवि पांडे व यशवंत कुमार ने इस पावन मंचन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रामलीला परिषद के अध्यक्ष पी. के. उपाध्याय, सचिव आदित्य प्रकाश पांडे एवं कोषाध्यक्ष पद्माकर मिश्रा भी उपस्थित
रहे।
