जैसी दिखती है, कैनवस पर वैसी ही तस्वीर उतार देता है, चित्रकारी का तेंदुलकर है

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जैसी दिखती है, कैनवस पर वैसी ही तस्वीर उतार देता है, चित्रकारी का तेंदुलकर है

प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती और जो प्रतिभावान होते हैं वे अपनी पहचान खुद ही बना ही लेते हैं. ऐसे ही प्रतिभावान छात्र की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं. गया शहर के कोयरीबाडी मुहल्ले
के रहने वाले अंशु कुमार बचपन से ही दिव्यांग हैं वह ना बोल सकते हैं , ना सुन सकते हैं, लेकिन उनके हाथों में जादू है.

प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती और जो प्रतिभावान होते हैं वे अपनी पहचान खुद ही बना ही लेते हैं. ऐसे ही प्रतिभावान छात्र की कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं. गया शहर के कोयरीबाडी मुहल्ले
के रहने वाले अंशु कुमार बचपन से ही दिव्यांग हैं वह ना बोल सकते हैं , ना सुन सकते हैं, लेकिन उनके हाथों में जादू है. 

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