माया से पार पाकर ही भक्ति स्वरूपा मां सीता का दर्शन संभव-पं0 नानालाल जी

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जी.के.मदान

रेणुकूट।(सोनभद्र)हिण्डाल्को प्रबंधन के सौजन्य से हिण्डाल्को आवासीय परिसर के कल्याण मण्डपम् हाल में पं0 नानालालजी राजगुरु के सात दिवसीय राम कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा प्रसंग में कथा व्यास पं0 राजगुरु ने बताया कि श्री हनुमानजी के भक्ति स्वरूपा माता सीता के अन्वेषण हेतु की गई यात्रा में तीनों माया के द्वारा उनका परीक्षण होता है। उसके उपरांत भक्ति स्वरूपा, सीता माता का दर्शन होता है। तीनों मायाओं में प्रथम-सात्विक माया, सुरसा नागमाता। द्वितीय-तामसी माया, समुद्र के अंदर सिंहिका एवं तृतीय-राजसी माया, लंकिनी। सात्विक माया को हनुमानजी ने प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त किया। तामसी माया का संहार करके अपने को सुरक्षित किया तथा राजसी माया को मुष्टिका प्रहार करके सुधार करके अपने पक्ष में किया, तभी माता सीताजी के दर्शन सफल हुए।
इससे पूर्व हिण्डाल्को के मुखिया श्री एन नागेश एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी नागेश ने श्री रामचरित्मानस का पूजन कर एवं कथा व्यास पंडितजी का टीका करके रामकथा प्रारंभ कराई। रामकथा का भारी संख्या में उपस्थित हिण्डाल्को कर्मचारियों, उनके परिवारों एवं रेणुकूट वासियों ने रसास्वादन किया।

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