गाजे-बाजे और जयकारों के साथ माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा का विसर्जन

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(जी.के.मदान/आदित्य सोनी)

रेणुकूट (सोनभद्र)। शारदीय नवरात्रि पूर्ण होने पर रेणुकूट व पिपरी नगर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में स्थापित माँ दुर्गा की प्रतिमाओं का शनिवार को धूमधाम से विसर्जन किया गया। गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और DJ की धुनों पर थिरकते श्रद्धालुओं ने “जय माता दी” के गगनभेदी उद्घोष के बीच माता रानी की शोभायात्रा निकाली, जो नगर का परिक्रमा करते हुए रिहंद जलाशय पर पहुँचकर सम्पन्न हुई।

विसर्जन से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अपराजिता पूजा, हवन, कलश विसर्जन और सिन्दूरदान की रस्में पूरी की गईं। इसके बाद सजीव माहौल में माँ दुर्गा, लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक ले जाया गया।

इस अवसर पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। परंपरा के अनुसार उन्होंने माँ दुर्गा को सिन्दूर चढ़ाकर सौंदर्य और शक्ति का सम्मान किया तथा एक-दूसरे की मांग पर सिन्दूर लगाकर समृद्धि और सौभाग्य की मंगलकामनाएँ दीं। इस रस्म को बंगाली परंपरा में “सिन्दूर खेला” और उत्तर भारत में “सिन्दूर दान” कहा जाता है। महिलाएँ मिठाई बाँटकर परस्पर प्रेम, सौहार्द और दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएँ देती रहीं।

श्री श्री दुर्गा पूजा समिति के युवा कार्यकर्ताओं ने नृत्य व गीत-संगीत से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। पदाधिकारियों ने बताया कि विसर्जन सनातन धर्म की परंपरा का अभिन्न अंग है, जिसमें प्रतिमा के श्रृंगार और सम्मान के बाद उसे जल में प्रवाहित किया जाता है।

नगर में आयोजित इस विसर्जन समारोह ने न केवल धार्मिक आस्था को चरम पर पहुँचाया, बल्कि सामूहिक उत्साह और सामाजिक एकता की मिसाल भी प्रस्तुत की।

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