विराट हिंदू सम्मेलन में इतिहास, राष्ट्रबोध और सामाजिक एकता का सशक्त आह्वान

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*रेणुकूट के गांधी मैदान में उमड़ा जनसैलाब, वीर नायकों के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने पर जोर*

(आदित्य सोनी)

रेणुकूट (सोनभद्र)। रविवार 11 जनवरी 2026 को स्थानीय गांधी मैदान में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में इतिहास, राष्ट्रबोध और सामाजिक एकता को लेकर ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक वक्तव्य दिए गए। सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अम्बरीश जी ने अपने संबोधन में कहा कि देश के इतिहास को जिस दृष्टि से पढ़ाया गया, उसमें बार-बार पराजय का भाव उभरकर सामने आया, जबकि भारत के वीर राजाओं, योद्धाओं और महापुरुषों के शौर्य, त्याग और बलिदान को अपेक्षित स्थान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और बंदा बैरागी जैसे महान योद्धाओं की संघर्षगाथाएं नई पीढ़ी तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक हैं, ताकि उनमें आत्मगौरव और आत्मविश्वास का निर्माण हो सके।

 


अम्बरीश जी ने कहा कि भारत के इतिहास को सही मायनों में समझने के लिए हिंदू समाज के योगदान और उसके मूल मूल्यों को जानना जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि भारत को विश्व के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाना है, तो समाज को एकजुट होकर अपने सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को अपनाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि केवल गणनाएं करने वाले इतिहास नहीं रचते, बल्कि स्थापित धारणाओं के विरुद्ध चलने वाले ही इतिहास बनाते हैं। भारत की प्रत्येक जाति और समाज में ऐसे वीर पैदा हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष किया है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने देश के विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान उन लोगों के लिए बना था, जिन्होंने ‘वंदे मातरम्’ कहने से इनकार किया, लेकिन आज भी कुछ लोग भारत में रहते हुए राष्ट्रीय भावनाओं से दूरी बनाए हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में रहकर बाबर और राम को एक ही तराजू पर तौलने की मानसिकता स्वीकार्य नहीं हो सकती।
कार्यक्रम की शुरुआत दुद्धी स्थित मां सरस्वती शिक्षा निकेतन से आई दो छात्राओं द्वारा प्रस्तुत संक्षिप्त एवं भावपूर्ण रामकथा से हुई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। इसके पश्चात संत मनीषानंद शनि महाराज, विभाग संघचालक पुनीत लाल जी, गोपाल सिंह, राम मंदिर पाटी के पुजारी द्वारिका प्रसाद, जिला प्रचारक योगेश जी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और समाज में संस्कार, संस्कृति तथा राष्ट्रप्रेम को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।
सम्मेलन में शिक्षिका शालिनी गुप्ता, नंदलाल गुप्ता, चाँदप्रकाश जैन, राकेश पाण्डेय, दिग्विजय सिंह, हरिराम शाह, आशुतोष पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और आम नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण बना रहा और लोगों ने एकजुट होकर सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया।
विराट हिंदू सम्मेलन के माध्यम से वक्ताओं ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि इतिहास के गौरवशाली अध्यायों को सामने लाकर ही समाज में आत्मसम्मान, राष्ट्रबोध और एकता को मजबूत किया जा सकता है।

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